एटीएम या बैंक से निकाले गए पांच सौ या हजार रुपये के नोट भी नकली हो सकते हैं। नकल भी ऐसी जो असल को मात करे। नकली नोटों में भी वे सारे सुरक्षा चिह्न मौजूद मिलेंगे जिनके आधार पर नकली और असली नोटों की पहचान होती है। इसके मद्देनजर गृह सचिव जी.के. पिल्लई को देश की सभी खुफिया व जांच एजेंसियों के प्रमुखों समेत वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलानी पड़ी।
बैठक में फैसला हुआ कि नेपाल और बांग्लादेश के बार्डर से लगे सभी निजी और सार्वजनिक बैंकों में जल्द से जल्द विशेष जर्मन मशीन लगाई जाए। दरअसल, नए नकली नोटों में असली नोटों के सभी सुरक्षा मानक पाए जा रहे हैं। सिर्फ एक सुरक्षा मानक ऐसा है जिसकी नकल नहीं की जा सकी है। वह है नोट पर बना महात्मा गांधी की तस्वीर का वाटर मार्क। नकली नोटों में यह वाटर मार्क बाहर से दबा कर बनाया जाता है, जो दिखने में असली वाटर मार्क जैसा ही नजर आता है। इस अंतर को सिर्फ जर्मनी में बनी एक खास मशीन के जरिये ही पकड़ा जा सकता है।
खुफिया एजेंसियों ने उन प्रमुख रास्तों की पहचान भी की, जिनसे नकली नोट देश के अंदर भेजे जा रहे हैं। खुफिया राजस्व निदेशालय यानी डीआरआई व कस्टम विभाग को इन रास्तों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें महत्वपूर्ण हवाईअड्डों पर अपने कार्यालय खोलने को भी कहा गया है। गृह मंत्रालय ने खुफिया ब्यूरो और रा को नकली नोटों के कारोबार के बारे में ज्यादा जानकारी जुटाने को कहा है। इस कड़ी में रा को खाड़ी के देशों समेत नेपाल, बांग्लादेश, कोलंबो, बैंकाक, क्वालालंपुर जैसे देशों पर खास तौर पर नजर रखने के लिए कहा गया है। ये देश नकली नोट भारत भेजने के प्रमुख अड्डों के रूप में कुख्यात हैं। खुफिया ब्यूरो को मुख्य तौर पर नेपाल और बांग्लादेश बार्डर से लगे इलाकों में संदिग्ध लोगों पर खास नजर रखने का निर्देश दिया गया है।
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Saturday, July 11, 2009
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